सुखेत।
ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र सुखेत सिलाई कला प्रशिक्षण कार्यक्रम एक सशक्त पहल के रूप में सामने आया है। कृषि विज्ञान केंद्र सुखेत द्वारा 07 जनवरी 2026 से आयोजित सिलाई कला प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन 13 जनवरी 2026 को सफलतापूर्वक किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण युवतियों एवं महिलाओं को स्व-रोज़गार हेतु दक्ष बनाना था।
कार्यक्रम की समन्वयक एवं होम साइंस की वैज्ञानिक डॉ. रीता देवी यादव ने बताया कि सिलाई कला महिलाओं के लिए रोजगार का सशक्त माध्यम है। इसके माध्यम से महिलाएं घर बैठे रोजगार कर सकती हैं और परिवार के लिए वस्त्र निर्माण कर पारिवारिक आय में भी वृद्धि कर सकती हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र सुखेत सिलाई कला प्रशिक्षण के अंतर्गत प्रतिभागियों को पारंपरिक सिलाई मशीन के साथ-साथ आधुनिक सिलाई मशीन चलाने, उनके रख-रखाव एवं देखभाल की विधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
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इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 30 महिलाओं एवं युवतियों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने सूट, सलवार, ब्लाउज एवं पेटीकोट जैसे दैनिक उपयोग के वस्त्रों की कटिंग एवं सिलाई का अभ्यास किया, जिससे उनमें स्वरोजगार शुरू करने का आत्मविश्वास विकसित हुआ।
समापन अवसर पर केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. एस.के. गंगवार ने कहा कि सिलाई कला प्रशिक्षण की बढ़ती मांग को देखते हुए आने वाले समय में कृषि विज्ञान केंद्र सुखेत द्वारा 10 से 15 दिवसीय उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों ने कृषि विज्ञान केंद्र सुखेत सिलाई कला प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे रोजगारोन्मुखी कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की।

