मधेपुर साइबर फ्रॉड मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है
मधेपुर (मधुबनी):
मधेपुर में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने WhatsApp के जरिए ठगी करने वाले दो साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर लोगों को APK फाइल भेजते थे और मोबाइल हैंग होते ही ठगी को अंजाम देते थे। यह ठगी सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि कई राज्यों तक फैली हुई थी।
पुलिस के अनुसार आरोपी व्हाट्सएप ग्रुप में SMS डॉक्युमेंट के साथ बैंक ऑफ इंडिया के नाम से एक APK फाइल भेजते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति उस फाइल को खोलता, उसका मोबाइल हैंग हो जाता था। इसके बाद उसी मोबाइल नंबर का गलत इस्तेमाल कर लोगों से पैसे ठगे जाते थे।
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शिकायत मिलते ही सबूत कर देते थे डिलीट
जब किसी पीड़ित को ठगी का शक होता और वह शिकायत करता, तो आरोपी तुरंत APK फाइल और व्हाट्सएप ग्रुप डिलीट कर देते थे, ताकि कोई डिजिटल सबूत न बचे। इसी तरीके से लंबे समय से यह साइबर ठगी का खेल चल रहा था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
पुलिस ने जिन दो युवकों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान भेजा थाना क्षेत्र के लीलजा परसौनी गांव निवासी 32 वर्षीय महेश कुमार, पिता गंगा साहू, और द्वालख गांव निवासी 25 वर्षीय श्रवण कुमार मंडल, पिता दिलीप मंडल के रूप में हुई है।
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श्रवण कुमार मंडल का अस्थायी निवास मधेपुर के सोनपुर मोहल्ला में था और वह पहले भी स्थानीय स्तर पर ठगी की घटनाओं में शामिल रह चुका है। वहीं महेश कुमार पिछले करीब दस वर्षों से मधेपुर में किराए के मकान में रहकर अलग-अलग शैक्षणिक संस्थान खोलने और बंद करने का काम करता रहा है।
न्यू बस स्टैंड में चल रहा था फर्जी संस्थान
जानकारी के अनुसार मधेपुर न्यू बस स्टैंड स्थित रामचंद्रा गांव निवासी एक सेवानिवृत्त शिक्षक के मकान में “एक्टिव एस.एम. स्किल फाउंडेशन” नाम से एक संस्थान खोला गया था। इसी जगह से साइबर ठगी का पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
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साइबर क्राइम टीम की बड़ी कार्रवाई
मधुबनी साइबर क्राइम के पुलिस उपाधीक्षक अंकुर कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मधेपुर न्यू बस स्टैंड में छापेमारी की। मौके से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और दो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। जब्त मोबाइल की तकनीकी जांच की जा रही है।
छापेमारी टीम में इंस्पेक्टर मुकूल रंजन कुमार सिंह, इंस्पेक्टर संतोष कुमार, एसआई रवि रंजन, एसआई रूचि कुमारी, एसआई नीरू कुमारी पटेल के साथ टेक्निकल टीम के डीईओ मिथिलेश कुमार यादव एवं प्रभाष कुमार सहित अन्य पुलिस बल शामिल थे।
कई राज्यों तक फैला हो सकता है नेटवर्क
पुलिस का मानना है कि इस साइबर फ्रॉड गिरोह का नेटवर्क बिहार के बाहर भी फैला हो सकता है। जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
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