गुरुग्राम। Subhash Chowk से Hero Honda Chowk तक का पूरा मार्ग इन दिनों एक ‘स्थाई जाम ज़ोन’ बन चुका है। सड़क के दोनों तरफ ट्रकों, कारों और भारी वाहनों की अवैध पार्किंग ने ट्रैफिक व्यवस्था की पूरी रीढ़ तोड़कर रख दी है। ऊपर से मेट्रो निर्माण कार्य इस समस्या को और भयावह बना रहा है।
लेकिन जो बात सबसे ज्यादा चुभ रही है—वह है ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन की चुप्पी। स्थानीय लोग खुले तौर पर कह रहे हैं कि यह जाम प्रशासन की “लापरवाही नहीं, बल्कि खुली असफलता” है।
पीक आवर्स में सड़क ‘चलती’ नहीं, बस रेंगती है
सुबह 9–11 बजे और शाम 5–8 बजे का हाल यह है कि हजारों वाहन Subhash Chowk से Hero Honda Chowk तक फंस जाते हैं।
लोगों ने गुस्से में कहा:
“सरकार मेट्रो बना रही है, पर सड़क पर चलना ही मुश्किल है!”
“हर दिन घर से दो घंटे पहले निकलना पड़ता है, कोई सुनने वाला नहीं!”
“क्या ट्रैफिक पुलिस को इस सड़क का पता भी है?”
आम 10 मिनट का रास्ता लोग 50–60 मिनट में तय कर पा रहे हैं।
यह मार्ग ऑफिस, स्कूल, मल्टी-नेशनल कंपनियों और इंडस्ट्रियल ज़ोन से जुड़ा होने के कारण हजारों यात्रियों की दिक्कत रोज़ बढ़ रही है।
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सड़क के दोनों किनारों पर अवैध पार्किंग — ट्रक, कंटेनर, पिकअप ने कब्जा कर रखा है
सबसे चिंताजनक बात यह है कि ट्रकों ने इस जगह को स्थाई पार्किंग स्पॉट बना लिया है।
कारें, टेम्पो और छोटे ट्रांसपोर्ट वाहन भी जहां जगह मिले, वहीं खड़े कर दिए जाते हैं।
लोग स्पष्ट रूप से कह रहे हैं:
“यह सड़क है या पार्किंग ग्राउंड?”
“ना डरा-डर, ना पुलिस—जो चाहे जहां पार्क कर दे!”
“किसी दिन बड़ा हादसा होगा, तब शायद प्रशासन जागेगा।”
अवैध रूप से खड़े वाहनों के कारण लेन सिकुड़ जाती है, और गाड़ियाँ एक-दूसरे को छूते हुए निकलती हैं।
मेट्रो निर्माण पहले ही सड़क को निगल चुका है — बची हुई जगह भी पार्किंग ने खा ली
मेट्रो रेल कॉरिडोर पर तेजी से काम चल रहा है।
जहां-जहां निर्माण क्षेत्र है, वहां:
बैरिकेडिंग
निर्माण सामग्री
भारी मशीनें
और ट्रैफिक डायवर्जन
ने पहले ही सड़क को आधा कर दिया है।
लोग कहते हैं:
“सड़क आधी मेट्रो वालों ने ले ली, बाकी आधी ट्रकों ने…”
“सरकार एक हाथ से विकास दिखा रही है, दूसरे हाथ से शहर को जाम में धकेल रही है!”
ट्रैफिक पुलिस पर सीधे आरोप — ‘सिर्फ कागज़ों में ऐक्शन, जमीन पर कुछ नहीं’
सबसे ज्यादा गुस्सा ट्रैफिक पुलिस पर है।
नागरिकों के अनुसार:
पूरे रूट पर स्थाई तैनाती नहीं
अवैध पार्किंग पर टोइंग नहीं
चालान भी कभी-कभार
पुलिस की उपस्थिति शून्य
अक्सर यह भी सुनने को मिला:
“पुलिस तभी आती है जब किसी वीआईपी का रूट हो, वरना जनता मरती रहे!”
यह बयान जनता के गुस्से को सीधे दिखाता है।
स्थानीय लोग क्या मांग कर रहे हैं?
जनता अब धैर्य खो चुकी है और सोशल मीडिया से लेकर मौके पर सब जगह आवाज़ उठा रही है:
✔ फौरन अवैध पार्किंग हटाई जाए
टोइंग वैन लगातार तैनात हों।
✔ पिक आवर्स में भारी वाहनों पर प्रतिबंध लगे
सुबह और शाम ट्रकों का प्रवेश रोका जाए।
✔ ट्रैफिक पुलिस की स्थाई तैनाती की जाए
कम से कम Subhash Chowk, Rajiv Chowk और Hero Honda Chowk के बीच।
✔ मेट्रो निर्माण क्षेत्रों में वैकल्पिक रूट तैयार हों
ताकि एक ही रोड पर ट्रैफिक का बोझ न पड़े।
स्थिति अगर इसी तरह रही तो यह रूट ‘डेड ट्रैफिक ज़ोन’ बन जाएगा
विशेषज्ञों के अनुसार:
मेट्रो कार्य में अभी समय लगेगा
वाहन संख्या बढ़ती जा रही है
सड़क पर “पार्किंग माफिया” सक्रिय दिखाई दे रहे हैं
ऐसे में बिना सख्त कार्रवाई, यह मार्ग शहर का सबसे अधिक जाम वाला रूट बन सकता है।

